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Sunday, 13 September 2026

इस्तदराज इस्लाम में एक आध्यात्मिक अवधारणा है,

इस्तदराज इस्लाम में एक आध्यात्मिक अवधारणा है, जिसमें अल्लाह लगातार पाप और अवज्ञा में लिप्त रहने वाले व्यक्ति को सांसारिक आशीर्वाद, धन या सफलता प्रदान करता है। यह एक क्रमिक, भ्रामक दंड के रूप में कार्य करता है जो अंततः उसके पतन की ओर ले जाता है। अर्थ और उत्पत्ति: भाषाई परिभाषा: अरबी मूल दा-रा-जा का अर्थ है कदम-दर-कदम आगे बढ़ना या धीरे-धीरे स्तरों में ऊपर-नीचे जाना। धार्मिक परिभाषा: यह दंड का एक छिपा हुआ रूप है, जिसमें अवज्ञाकारी व्यक्ति को प्रचुर मात्रा में भोजन, स्वास्थ्य और विलासिता प्राप्त होती है, जिससे वह यह झूठा विश्वास करने लगता है कि अल्लाह उससे प्रसन्न है। भ्रम: पश्चाताप करने या ईश्वर की ओर लौटने के बजाय, व्यक्ति अहंकारी, पापी और अपनी झूठी सफलता में आश्वस्त होता जाता है, जब तक कि अचानक दंड नहीं आ जाता। इस्लामी ग्रंथों में संदर्भ: कुरान: सूरह अल-अराफ़ (7:182) और सूरह अल-अनआम (6:44) में उल्लेख है, जहाँ अल्लाह कहता है कि जब लोग याद दिलाए जाने को भूल जाते हैं, तो उनके लिए समृद्धि के द्वार खुल जाते हैं, जब तक कि वे जो कुछ उन्हें दिया गया है, उस पर आनंदित नहीं हो जाते—और फिर वे अचानक आश्चर्यचकित हो जाते हैं। हदीस: पैगंबर मुहम्मद (उन पर शांति हो) ने चेतावनी दी है कि यदि आप अल्लाह को किसी व्यक्ति को उसके पापों में निरंतर बने रहने के बावजूद सांसारिक वस्तुओं में से उसकी मनपसंद चीजें देते हुए देखें, तो यह इस्तदराज है। स्रोत: (https://hadithanswers.com/explanation-of-the-word-istidraj/) #AIoverview

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